ध्वनि प्रदूषण से कानो की रक्षा कैसे करें ?




ध्वनि प्रदूषण से कानो की रक्षा कैसे करें? जानिए

वर्तमान समय में बढ़ते तकनीकी विकास के चलते विभिन्न प्रकार के आधुनिक उपकरणों, वाहनों, संगीत यंत्रों, और अधिक क्षमता वाले ध्वनि यंत्रों का निर्माण हो रहा है। यह सभी ध्वनि प्रदूषण का मुख्य स्त्रोत है। जी हाँ, इन सभी से निकलने वाली सामान्य से अधिक डेसीबल क्षमता की आवाज आपको बहरा बनाने में अधिक समय नहीं लेती है। इस शोर के लगातार संपर्क में रहने से कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है।



तो चलिए अब बात करते है की ध्वनि प्रदुषण क्या है? और यह किस प्रकार से आपके स्वास्थ्य और कानो पर बुरा प्रभाव डालता है? साथ ही इससे बचने के लिए कुछ आवश्यक उपाय भी जानिए।



ध्वनि प्रदूषण क्या है?

जब हमारे आस पास किसी श्रोत से उत्पन्न होने वाली ध्वनि मानव की सुनने की क्षमता से अधिक स्तर की होती है। तो इस प्रकार की ध्वनि से उत्पन्न होने वाली तरंगे वातावरण में मौजूद वायु के कणो को अधिक कम्पित कर देती है। जिससे आपके आस पास के वातावरण में शोर की तीव्रता बढ़ जाती है। यह तेज़ आवाज या शोर ही ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण होता है।



ध्वनि प्रदूषण

वर्तमान समय में इस प्रकार के शोर और ध्वनि प्रदूषण को उत्पन्न करने वाले कारकों की कही कोई कमी नहीं है। हालाँकि सबसे निराशाजनक बात तो यह है की यह सभी स्वयं मानव की ही देन है। ऐसे कई मामले है जिनमे देखा गया है की मनुष्य खुद अपने पतन का कारण बन रहा है। ध्वनि प्रदूषण भी उनमे से एक विषय है।

चूँकि यह मानव जनित समस्या है तो यह भी जाहिर सी बात है की ध्वनि प्रदूषण के अत्यधिक कारक मनुष्य निर्मित है। हालाँकि सभी कारकों के लिए मनुष्य को जिम्मेदार ठहरना उचित नहीं होगा। क्योंकि तीव्र शोर उत्पन्न करने के पीछे कुछ कारण प्राकृतिक भी होते है। जैसे – ज्वालामुखी का फटना, बादलों का गरजना, तूफ़ान का आना आदि।


ध्वनि प्रदूषण से कान पर प्रभाव

अति हर चीज की बुरी होती है, फिर चाहे वह कुछ भी हो। ठीक इसी प्रकार सामान्य से अधिक तीव्रता वाली ध्वनियों को लगातार सुनने से आपके कान पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे धीरे-धीरे आपकी सुनने की शक्ति में कमी भी आती है। लगातार बढ़ रहे शोर के कारण वर्तमान समय में लोगों को अपने आसपास की तेज़ ध्वनियों के बीच आपसी बातचीत भी ठीक से सुनाई नहीं देती है।



इससे आपके कान की नाजुक संरचना इतने अधिक मात्रा में ध्वनि का उत्सर्जन सहन नहीं कर सकती है। क्योंकि लगातार सुनाई देने वाला शोर एक बहुत ही अप्रिय स्थिति होती है। जिससे आपको असुविधा होने के साथं-साथ बहुत अधिक तकलीफ का सामना भी करना पड़ सकता है। अपनी रोजमर्रा की आदतों के कारण मनुष्य हो सकता है की इस ध्वनि प्रदुषण का आदि होने लगा है।

पर जाने अनजाने मनुष्य अपने कानो को हो रहे लगातार नुकसान को रोक नहीं सकता है। यह एक गंम्भीर स्थिति है। तो आइये जानते है की ध्वनि प्रदुषण से आपके कानो को क्या-क्या नुक्सान हो सकता है? ध्वनि प्रदुषण से कानो को निम्नलिखित नुकसान हो सकते है –

1. सुनने में समस्या

ध्वनि प्रदुषण का सबसे अधिक प्रभाव हमारे कानो पर ही पड़ता है। क्योंकि लगातार शोर के संपर्क में रहने के कारण आपकी श्रवण क्षमता पर बुरा असर होता है और यह धीरे धीरे कम होने लगती है। जिसके परिणाम स्वसरूप सामान्य रूप से सुनी जा सकने वाली ध्वनियों को भी सुनने में आपको बहुत अधिक संघर्ष करना पड़ सकता है। यह आपके कान को नुकसान पहुंचाने के साथ ही आपको प्रवाहकीय श्रवण हानि का शिकार भी बना सकती है।

2. कान का पर्दा फटना

अचानक से होने वाले बहुत तेज़ शोर या धमाके की आवाज से आपके कान को किसी बड़े आघात जितना झटका लगता है। हालाँकि आपके कान के अंदर पायी जाने वाली युस्टेशियन ट्यूब जो की आपके कान के दोनों ओर दबाव को सामान्य रखने का काम करती है। इस अधिक तेज़ शोर या धमाके की गूँज से उत्पन्न होने वाले दबाव को अवषोषित कर लेती है। पर जब कभी यह ठीक प्रकार से काम नहीं करती या फिर शोर की तीव्रता बहुत अधिक होती है। तो फिर आपके कान का पर्दा फटना जैसी समस्या हो सकती है।

3. संवेदी नसों को क्षति

लगातार कान के परदे पर पड़ने वाला तीव्र स्वर आपके कान के मध्य भाग से होता हुआ आंतरिक हिस्से में पहुँचता है। जहां पर ध्वनियों को संकेतों में परिवर्तित कर दिमाग तक भेजने का काम श्रवण तंत्रिका करती है। इस स्थान पर पायी जाने वाली अनगिनत संवेदी कोशिकाएं ध्वनि के तीव्र उत्सर्जन के कारण नष्ट होने लगती है। इससे आपके कान की नस में क्षति पहुँचती है। इसके परिणाम स्वरुप आपके सुनने की क्षमता बहुत अधिक प्रभावित होती है। और आप संवेदी श्रवण हानि का शिकार हो जाते है।

4. कान से खून आना

आपके कान की नलिका और उसके अंदुरुनी भाग में बहुत महीन और अधिक मात्रा में रक्त शिराएं पायी जाती है। यह कोशिकाएं बहुत नाजुक होती है। जब कभी अधिक शोर भरे वातावरण जैसे कारखाने, निर्माण स्थल, या युद्ध क्षेत्र आदि में काम करने या रहने से, अथवा अचानक ही आपके आसपास कोई धमाका होने से भी शक्तिशाली तरंगे निकलती है। यह तरंगे आपके कान में जबरदस्त आघात कर सकती है। जिससे आपके कान की नाजुक कोशिकाएं फट भी सकती है और आपके कान से खून आने जैसी स्थिति हो सकती है।

5. टिनिटस या कान बजना

ध्वनि तरंगों की अधिकता में सामान्य से अधिक समय व्यतीत करने से आपके कान में पड़ने वाला यह शोर लगातार आपके कान के परदे को कम्पित करता रहता है। और जब यह शोर बंद होता है तो आपके कान में होने वाले आभासीय कम्पन आपको बाद में भी महसूस हो सकते है। इस स्थिति को टिनिटस कहा जाता है। यही कारण है की जब कभी आप तेज़ गाना सुनते है तो उसके बाद आपको कानो में सीटी बजने का एहसास होता है, यह टिनिटस के लक्षण कहलाते है।



6. बोलने में समस्या

हमारे बोलने का कौशल कही न कही हमारी सुनने की योग्यता से जुड़ा है। यही वजह है की जब बच्चे शारीरिक विकास के दौर में होते है तो सुन कर बातो को बोलने की कोशिश करते है। पर यदि बच्चे सुन ही न पाए तो? आजकल बढ़ते शोर के प्रभाव से बच्चों के कान पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ रहा है। जिससे उनके सुनने की शक्ति बचपन से ही कम होने लगी है। यह भी जन्मजात बहरापन का एक कारण है। और इसका सबसे बुरा पहलु यह की बच्चों को बोलने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। और बच्चों में हकलाने और तुतलाने जैसे लक्षण भी देखने को मिलते है।

7. कान में आघात लगना

अचानक होने वाले तीव्र ध्वनि विस्फोट जैसे – बादल का गरजना, बिजली का कड़कना, धमाका होना आदि। यह सभी बहुत बड़े पैमाने पर ध्वनि प्रदुषण और दबाव उत्पन्न करते है। यदि आप इनमें से किसी भी घटना के समय उस स्थान पर उपस्थित है तो यह विस्फोट आपके कानो के लिए किसी आघात से कम नहीं है। यह बिलकुल वैसा ही प्रभाव और तकलीफ प्रदान करता है जैसे किसी ने आपके सिर पर हथौड़े से प्रहार किया हो। इससे आपके आंतरिक कान को बहुत अधिक नुकसान पहुँचता है।



8. कान में तकलीफ

सबसे अधिक समस्या वाहनों द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रदुषण से होती है। क्योंकि यह लगातार आपके आसपास होती ही रहती है। इस निरंतर शोर के कारण आपके कान में दवाब पड़ता है। जिससे आपको तकलीफ और कान में दर्द जैसी स्थिति अनुभव होती है। यहाँ तक की अधिक तीज आवाजों को सुनने से छोटे बच्चों के कान में दर्द भी हो सकता है। और वह रोने और चिड़चिड़ाने लगते है।

9. स्थायी बहरापन

ध्वनि प्रदुषण का निरंतर प्रभाव और इसके कारण लगातार काम हो रही श्रवण शक्ति से आपको बड़े स्तर पर समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। क्योंकि लगातार शोर और बढ़ती उम्र के कारण आपके कानो की कुशलता धीरे-धीरे घटने लगती है। इससे एक समय ऐसा भी आता है जब आप अपनी सुनने की शक्ति को पूरी तरह से खो देते है। और बहरापन से ग्रस्त हो जाते है। और आपके लिए अपने आसपास हो रही आवाजों को सुनना नामुमकिन हो जाता है। यह एक भयावह स्थिति है।

ध्वनि प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य

ध्वनि प्रदुषण का जितना गहरा असर आपके कानो पर पड़ता है उतना ही आपके शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है। क्योंकि इससे उत्पन्न होने वाली तरंगे सिर्फ आपके नहीं बल्कि शरीर से भी टकराती है। तो जितनी अधिक तीव्र आवाज होगी उससे निकलने वाली तरंगे भी उतनी शक्तिशाली होंगी। यह आपके सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालता है। इससे आपको कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती है।

ध्वनि प्रदूषण से मानव स्वस्थ को निम्नलिखित नुकसान होते है –

1. गंभीर सिरदर्द

आपके आस पास से आने वाली घ्वनियां कानो के माध्यम से आपके दिमाग तक पहुँचती है जहाँ दिमाग इनमे छुपी जानकारी को प्राप्त करता है। पर सामान्य से अधिक मात्रा में ध्वनियों का उत्सर्जन और लगातार आपके कान में पहुंचने वाला शोर एक प्रकार से मानसिक दबाव उत्पन्न करता है। जिससे आपको गंभीर रूप से सिरदर्द हो सकता है, साथ ही इस स्थिति के लगातार बने रहने से आपको माइग्रेन जैसी गंभीर बिमारी भी हो सकती है।

2. ह्रदय आघात

ध्वनि तरंगो का तीव्र विस्फोट या फिर किसी धमाके से उत्पन्न होने वाला शोर और ऊर्जा जब अचानक से आपसे टकराती है तो आपको जबरदस्त आघात लग सकता है। और यदि आप कमजोर दिल वाले है, या फिर ह्रदय सम्बन्धी समस्याओं से ग्रस्त है तो फिर यह आपको ह्रदय आघात पंहुचा सकता है। जिससे आपके दिल की धड़कन रुक सकती है। ऐसे कई मामलो में देखा गया है की ध्वनि विस्फोट से होने वाले हार्ट अटैक से व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है।



3. असामन्य रक्तचाप

आमतौर पर ऐसे स्थानों के समीप रहने से जहाँ ध्वनि प्रदुषण अधिक मात्रा में होता है, आपके शरीर में पायी जाने वाली रक्त शिराओं और धमनियों पर अधिक दबाव पड़ता है। इसके परिणाम स्वरुप नसों में खून अधिक तेज़ी से दौड़ता है। और शरीर के सभी अंगों में रक्त पहुंचाने की क्रिया अनियमित हो जाती है। साथ ही इससे आपको उच्च रक्तचाप की समस्या, घबराहट, और असहजता भी महसूस होती है।

4. मानसिक तनाव

यदि आपके आसपास का वातावरण शांत नहीं है। या फिर आप ऐसी जगहों पर रहते या काम करते है, जहाँ निरंतर शोर होता रहता हो। तो ऐसे में इसका सीधा सा असर आपके दिमाग पर भी पड़ता है। और आप किसी भी काम को करने में, अथवा ध्यान केंद्रित कर पाने में कठिनाई महसूस करते है। आपको इस अवस्था में बहुत अधिक बेचैनी व चिड़चिड़ापन भी महसूस हो सकता है।

5. अशांति व उत्तेजना

जैसा की अभी हमने आपको बताया है की आसपास का माहौल शोरगुल से भरा होने के कारण आपको बहुत अधिक असुविधा हो सकती है। कुछ लोग इस शोर को नजरअंदाज करने का हुनर रखते है, क्योंकि उन्हें इसकी आदत पड़ चुकी होती है। पर जो व्यक्ति इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते है, उनके लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं है। क्योंकि इससे उन्हें उत्तेजना और गुस्सा महसूस होता है। साथ ही उनके आसपास की शोर-युक्त गतिविधियों से उन्हें मानसिक अशांति का सामना करना पड़ता है।

6. असामान्य नींद

ध्वनि प्रदुषण और और आसपास के शोर से भरे वातावरण का बुरा असर सीधा आपकी नींद पर भी पड़ता है। जिससे आपको सोने में परेशानी, असामान्य नींद, अथवा नींद न आने की समस्या तक से जूझना पड़ सकता है। साथ ही यह स्थिति आपके दिमाग और सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर डालती है। क्योंकि बेहतर स्वास्थ्य की दृष्टि से भरपूर नींद लेना बहुत जरूरी है। जिससे आपका दिमाग और शरीर के बाकी अंग सुचारु रूप से अपना काम कर सकें।

ध्वनि प्रदूषण के कारण

जैसा की पहले हम बात कर चुके है की यह समस्या अधिकतर मानव निर्मित संसाधनों के कारण उत्पन्न होती है, पर कुछ कारक प्राकृतिक भी है। तो इस तथ्यानुसार इन्हे दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है। पहला है मानव निर्मित और दूसरा है प्राकृतिक, तो चलिए इन दोनों ही श्रेणियों के बारे में कुछ अधिक जानकारी प्राप्त करते है।

ध्वनि प्रदूषण के मानव निर्मित कारण

ध्वनि प्रदूषण के मानव निर्मित कारक निम्नलिखित है –

1. यातायात के वाहन

आजकल दूरी को कम करने के लिए रफ़्तार को बढ़ाना आम बात है। इसलिए वाहनों में अधिक क्षमता वाले इंजन का इस्तेमाल होने लगा है। पर यह इंजन आपके कार या मोटरसाइकिल की रफ़्तार बढ़ने के साथ ही अधिक शोर भी उत्पन्न करते है। यही नहीं इनमे लगे प्रेशर हॉर्न भी कुछ कम नहीं है, यह भी वातावरण में शोर को बढ़ने में पूरा योगदान देते है। कार और बाइक के अतिरिक्त ट्रेन और हवाई जहाज से निकलने वाले शोर की तीव्रता भी बहुत अधिक होती है। हवाई जहाज जमीन से ऊपर उठते समय, हवा में, और यहां तक की नीचे उतरते समय भी लगभग अपने आसपास 100 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को प्रभावित करता है।




2. लाउडस्पीकर

अवसर चाहे ख़ुशी का हो गम का हो अथवा धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हो, लाउडस्पीकर का प्रयोग होना बहुत आम बात है। लाउडस्पीकर से निकलने वाली ध्वनि को बहुत अधिक बढ़ाया जा सकता है। जिससे यह अधिक खतरनाक हो जाती है। किसी जन्मदिन, शादी, या अन्य समारोह अथवा धार्मिक प्रयोजनों में लाउडस्पीकर पर गाने बजाना या घोषणा करना आपके कानो के लिए बहुत हानिकारक होता है।

3. संगीत उपकरण

आजकल नए-नए गानों और संगीत के प्रति लोगों में बढ़ता जूनून और पागलपन आपके कानो पर बहुत ही बुरा प्रभाव डालता है। क्योंकि संगीत को सुनने के लिए नए किस्मे के संगीत उपकरण और हेडफोन का इस्तेमाल होने लगा है। और यह सभी सामान्य से अधिक ध्वनि निकलने में सक्षम होते है। इससे भी बुरी बात यह है की यह आपके कानो को पूरी तरह ढँक लेते है जिससे तेज़ शोर सीधे आपके कान के परदे पर पड़ता है। जिससे कान को बहुत हानि होती है।

4. भवन निर्माण

दूर-दूर तक अपनी पहुँच बनाने और ऊँचे गगनचुम्बी इमारतों में अपना घर बनाने की मनुष्य की इच्छा बर्षों से रही है। यही कारण है की मानव अपने आसपास लगातार शहरीकरण और भवन निर्माण करता रहता है। काम करने और रहने के लिए नए व आधुनिक ईमारत बनाते समय इससे होने वाले शोर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। निर्माणाधीन स्थान पर विभिन्न मशीनों और उपकरणों के इस्तेमाल से हद से ज्यादा ध्वनि प्रदुषण होता है।

5. सामाजिक सभा

किसी रैली या सभा आयोजन में बड़े स्तर पर लोगों के शामिल होने से अधिक भीड़-भाड़ का माहौल बन जाता है। ऐसे में भाषण देने, नारेबाजी करने और और आपसी चर्चा आदि के कारण भी बहुत अधिक शोरगुल की स्थिति बन जाती है। जो की उस भीड़ में मौजूद लोगों के स्वास्थ और कानो के लिए बिलकुल भी उचित नहीं होती है। इसका जितना बुरा प्रभाव आपके कानों पर पड़ता है उतना है आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

6. उद्योग व कारखाने

लगातार बढ़ते व्यापार, और संसाधनों की पूर्ती के लिए विभिन्न प्रकार के उत्पादों को बनाने के लिए नए-नए व आधुनिक निर्माण क्षेत्र और कारखाने भी बनाये जा रहे है। इनकी बढ़ती तादाद के कारण और दिन-रात फैक्ट्रियों में चलने वाले काम के कारण इस्तेमाल होने वाली मशीनरी से उत्पन्न होने वाला शोर भी कानो के लिए बहुत हानिकारक होता है। यह उस स्थान पर काम करने वाले व्यक्तियों को बड़ी आसानी से अपनी चपेट में ले लेता है।

ध्वनि प्रदूषण के प्राकृतिक कारण
ध्वनि प्रदूषण के प्राकृतिक कारणों में निम्नलिखित मुख्य है –

1. ज्वालामुखी का फटना

पृथ्वी के गर्भ में गर्म धातुओं का खजाना है जो की गर्म और पिघली अवस्था में रहती है। इसके ऊपर कई सारी परतें होती है। इन परतों में असंतुलन और और गर्भ में भरी धातुओं में बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए कभी-कभी ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटना होती है। जिससे गर्भ में मौजूद गर्म लावा कई किलोमीटर ऊंचाई तक निकलता है। इतने शक्तिशाली धमाके के होने के कारण इससे उत्पन्न शोर की तीव्रता भी बहुत अधिक होती है।



2. बादलों का गरजना

यह एक और प्राकृतिक घटना है जो कभी भी घट सकती है। जब कभी बहुत अधिक मात्रा में बारिश होती है। तो उस स्थान पर बारिश करने वाले बादलों का जमघट लग जाता है। ऐसे में इन बादलों के आपस में टकराने से बहुत तेज ध्वनि निकलती है, और पानी भी गिरता है। यह शोर वैसे तो कुछ समय के लिए ही होता है पर फिर भी इसकी तीव्रता बहुत अधिक हो सकती है।

3. आकाशीय बिजली

जब घने बादलों का जमाव आसमान में होता है तो इनके आपस में टकराने और घर्षण से एक प्रकार का इलेक्ट्रिक डिस्चार्ज उत्पन्न होता है जो तुरंत धरती पर पहुँचता है। क्योंकि इन दोनों में विपरीत चार्ज होता है। इस प्रक्रिया के दौरान जब बिजली जमीन पर गिरती है। तो एक बहुत तीव्रता वाले धमाके जैसी आवाज होती है। हालाँकि यह प्रक्रिया कुछ सेकेण्ड के लिए होती है। पर इससे निकलने वाली जबरदस्त ध्वनि से तुरंत आपके कान के पर्दे फट सकते है।

4. तूफ़ान का आना

ऐसी बहुत सी प्राकृतिक आपदाएं है, जैस – ज्वार-भाटा, चक्रवात, बबंडर आदि। जिनकी वजह से अक्सर जमीन पर या खुले समुद्र में सुनामी, कटरीना, नीलोफर जैसे तूफ़ान आ जाते है। साथ ही ऐसी अवस्था में हवाएं सामान्य से बहुत अधिक तीव्रता से चलने लगती है। ऐसे में इन हवाओं के चलने और टकराने से निकलने वाला शोर भी बहुत अधिक होता है। जो आपके कानो पर बुरा असर डाल सकता है। हालाँकि यह असहनीय नहीं होता पर नुकसान पहुँचाता है।


ध्वनि प्रदूषण से जटिलताएं
ध्वनि प्रदूषण से आपके कान व शारीरिक स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है। साथ ही यदि इसकी तीव्रता असहनीय हो तो आपको बहुत सी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। यह सभी आपकी परेशानी को और अधिक बढ़ाने के साथ-साथ आपकी सुनने की क़ाबलियत को भी कम करती है। जिससे आप स्थायी रूप से बहरेपन की ओर निरंतर खींचते चले जाते है।


  • ध्वनि प्रदूषण से होने वाली जटिलताएं निम्नलिखित हो सकती है –
  • शरीर की मेटाबोलिक (चयापचयी) प्रक्रिया विपरीत रूप से प्रभावित होती है।
  • शरीर में एड्रिनल नामक हार्मोन का स्तर सामान्य से बढ़ जाता है।
  • जिससे शरीर की धमनियों में अधिक कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है।
  • ध्वनि प्रदूषण से मनुष्य की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर होता है
  • पीड़ित व्यक्ति की प्रजनन क्षमता कम अथवा नष्ट भी हो जाती है।
  • अचानक ध्वनि विस्फोट से आपके कान का पर्दा तुरंत फैट सकता है।
  • सोनिक बूम के कारण किसी गर्भवती स्त्री का गर्भपात भी हो सकता है।
  • ध्वनि प्रदूषण से जंगली जानवरों को भी बहुत नुकसान पहुँचता है।
  • इसके कारण जंगली जानवरों की अचानक मृत्यु भी हो सकती है।
  • पानी में रहने वाले जलीय जीव भी इससे बहुत पीड़ित है।
  • यह जलीय जंतुओं की मौत और बिलुप्तीकरण का मुख्य कारण है।
  • इससे व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन होना भी एक समस्या है।
  • अधिक गुस्सा, और आक्रामक प्रवृत्ति का बढ़ना भी देखा जा सकता है।
  • ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम

ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए सावधानियां बेहद जरुरी है। इसलिए यहाँ हम आपको कुछ खास सुझाव देने जा रहे है। और उम्मीद करते है की इनसे आपको कुछ हद तक लाभ अवश्य होगा। ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के लिए आपको निम्नलिखित उपाय करने चाहिए –


  • घर से बाहर निकलते समय अपने कानो को ढँक कर निकलें।
  • संगीत कार्यक्रम में जाते समय कान रक्षक का प्रयोग जरूर करें।
  • लाउड स्पीकरों के बहुत अधिक नजदीक बिलकुल भी न जाएँ।
  • शोर शराबे वाले सामूहिक स्थानों पर कान में ईयरप्लग लगाएं।
  • वाहन चलाते समय हॉर्न का अनावस्यक प्रयोग बिलकुल न करें।
  • स्कूल, कालेज और हॉस्पिटल के पास हॉर्न बिलकुल मत बजाएं।
  • बहुत अधिक तेज आवाज में टीवी पर गाने और कार्यक्रम न सुने।
  • पार्टी और शादी जैसे अवसरों पर संगीत की तीव्रता नियंत्रित करें।
  • वाहनों में अधिक क्षमता वाले प्रेशर हॉर्न का प्रयोग बिलकुल न करें।
  • हेडफोन व ईयरफोन पर बहुत तेज़ आवाज में गाने बिलकुल न सुने।
  • अधिक समय तक या लगातार कान में हेडफोन का प्रयोग मत करें।
  • अनावस्यक रूप से ध्वनि प्रदूषण न फैलाएं न किसी को फ़ैलाने दें।
  • ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण


यह समस्या व्यक्तिगत होने के साथ साथ वैश्विक भी है। इसलिए यह आपकी और देश की सरकार की सम्मलित कोशिशों से ही नियंत्रित की जा सकती है। जिसका सीधा सा मतलब यह है की हमें इस समस्या से उबरने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए, तभी कोई हल निकाला जा सकता है।


  • ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित काने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए –
  • कानून के अंतर्गत निर्धारित किये गए ध्वनि मानक नियमों का पालन करें।
  • व्यावसायिक तौर पर ध्वनि उत्सर्जन की सीमा 75 डेसीबल तक होनी चाहिए।
  • स्कूल, कालेज और अस्पतालों को ध्वनि प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करना चाहिए।
  • कारखानों में अधिक शोर करने वाली मशीनों को ध्वनिरोधी कमरों में लगाएं।
  • अधिक शोर वाले स्थलों पर कर्मचारियों को निशुल्क कान रक्षक प्रदान करें।
  • जिन गाड़ियों का ध्वनि उत्सर्जन बहुत अधिक है उन पर रोक लगनी चाहिए।
  • वाहनों में प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल कानून के तहत वर्जित किया जाना चाहिए।
  • बड़ी फैक्टरी और कारखानों को शहर से कुछ दूर स्थापित किया जाना चाहिए।
  • अधिक शोर करने वाली और पुरानी मशीनों को एक समय बाद बदलना चाहिए।
  • आधुनिक और काम शोर करने वाली मशीनरी का निर्माण किया जाना चाहिए।
  • अधिक शोर वाले स्थानों पर पेड़ लगाने चाहिये, यह ध्वनि अवशोषित करते है।

निष्कर्ष व परिणाम
आजकल के आधुनिक दौर में जहाँ मनुष्य में तरक्की की उचाईयों को छुआ है। वही उसने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और प्रदुषण फैलाने में भी कोई कमी नहीं छोड़ी है। इससे उत्पन्न होने वाला विपरीत प्रभाव स्वयं मानव को भी अपनी चपेट में ले रहा है। इसलिए यह कहा जाना भी उचित है की मानव स्वयं अपने पतन का कारण है। पर अब हमें अपनी गलतियों से सीखना चाहिए। एकजुट होकर प्रकृति को अपने पुराने रूप में वापस लाएं, ध्वनि प्रदुषण नियंत्रित करें। जिससे आप बेहरत सुने व स्वस्थ रहें।



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