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बच्चों के कान में दर्द (चाइल्ड ईयर पेन) – कारण व निवारण


घर में छोटे बच्चों का हँसना, खिलखिलाना दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी है। पर जब बच्चे दर्द से रोने लगते है, तो आपको तकलीफ होती है। इस दर्द के कई कारण है, उनमे से एक है बच्चों के कान में दर्द, जो उन्हें भयानक तकलीफ देता है। क्योंकि नन्हे-मुन्हे बच्चे तकलीफ नहीं सहन कर सकते है, इसलिए दर्द होने पर रोने लगते है। और उनका रोना आपके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होता है। क्योंकि अपने आँख के तारे जैसे बच्चों को कोई भी माँ-बाप या परिवार दर्द से तड़पता हुआ नहीं देख सकते है।


तो चलिए जानते है की बच्चों के कान में दर्द होने पर क्या करें? यह किस प्रकार बच्चों को तकलीफ पहुंचता है? साथ ही इसके निवारण के असरदार घरेलु उपाय भी जानिए।


बच्चों में कान दर्द
अक्सर नए शादीशुदा जोड़ों को यह नहीं पता होता है, की उनके छोटे बच्चों के कान में दर्द हो तो क्या करना चाहिए? क्योंकि बच्चे जब खेलते-खेलते अचानक से रोने लगते है, या अपने कान को खींचने जैसी क्रिया करते है। तो इसका मतलब है, की उसके कान में कोई समस्या है। या फिर आपका बच्चा किसी अन्य शारीरिक तकलीफ में है, जैसे दांत निकलना आदि।


ऐसे कई कारण है जैसे – कान में सूजन, कान में मैल, मवाद निकलना, खून आना, कान में पानी चला जाना अदि जो कानदर्द को बढ़ावा देते है। और यह जाहिर सी बात है की कानदर्द बच्चों के लिए असहनीय पीड़ा का सबब बन सकता है। तो बच्चों के दर्द को रोकने के लिए आपको इस समस्या के कारण और लक्षण दोनों पता होने के साथ ही इसके निदान के उपाय पता होने चाहिए।

बच्चों के कान में दर्द के लक्षण
उम्र में बड़े बच्चे समस्या समझ न आने पर भी अपने दर्द को बता सकते है। पर अधिक छोटे या नवजात शिशु अपने कान में कोई परेशानी होने पर कुछ विशेष व्यवहार प्रदर्शित करते है। इसे समझने पर आप उनकी तकलीफ भी आसानी से समझ सकते है। यह कई बार बच्चों में कान पकड़ने की आदत मात्र भी हो सकती है।

क्योंकि हो सकता है, की आपके लाड़ले को पहली बार अपने कान महसूस हुए हों। कई बार इसलिए भी बच्चे अपने कान से खेलते है, यह कोई समस्या नहीं है। इस आदत को आप आसानी से नजर अंदाज कर सकते है। पर यदि वो साथ में रोते भी है, तो आप इन लक्षणों की तलाश कर सकते है –




  • कान पकड़ कर रोती बच्ची
  • कान खींचना और रोना
  • कान को पकड़ना, मरोड़ना
  • कान रगड़ना या कुरेदना
  • गंभीर या रोने जैसी मुद्रा में होना
  • कान के आसपास त्वचा लाल होना
  • कान से स्त्राव या कान बहना
  • मुँह व जबड़ा खोलने में तकलीफ
  • अधिक दर्द से बुखार आना
  • स्तनपान करने या खाने में तकलीफ
  • कान में भारीपन (बंद कान) होना
  • कान से कम सुनाई देना
  • आवाज देने पर प्रतिक्रिया न देना

बच्चों के कान में दर्द के कारण
बच्चे के कान में दर्द एक आम समस्या भी हो सकती है, पर सिर्फ स्वस्थ की दृष्टि से, क्योंकि दर्द तो वह आपके बच्चे को दे ही रही है। ऐसे में नन्हे बच्चों के दर्द की समस्या के अंतर्गत कई कारक छुपे होते है जिनके बारे में समझना बेहद जरुरी है। जिससे की शिशु की तकलीफ को घटाया जा सके, कुछ प्रमुख कारणों में बच्चे के –


  • नाहाता हुआ बच्चा
  • नए दांत निकलना दर्द होना
  • कान में साबुन, शैम्पू जाना
  • कान में पानी जाना
  • कान में फुंसी होना
  • कान में चोट लगना
  • कान में कीड़ा चले जाना
  • गलत तरीके से कान साफ करना
  • सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर
  • बच्चे को लेटे हुए स्तनपान करना
  • कान में संक्रमण होना
  • बच्चे के कान में खुजली होना
  • कान में मैल जमना
  • कान की सफाई न करना
  • बच्चों में गले का संक्रमण
  • टांसिल्स में सूजन
  • किसी प्रकार की एलर्जी
  • कान को सही पोषण न मिलना
  • दर्द की रोकथाम व सावधानियां

बच्चे के कान के दर्द को रोकने के लिए सबसे अच्छा है, की इस समस्या को होने से रोकना, क्योंकि न बीमारी होगी न तकलीफ इसके लिए आपको निम्न उपाय या सावधानियां रखनी चाहिए –


  • बच्चे को दूध पिलाना
  • बच्चे को ठीक स्थिति में पकड़कर स्तनपान कराएं
  • नहलाते समय बच्चे के कान में पानी न जाये
  • साबुन और शैम्पू का झाग कान में न जाने दें
  • बच्चे के कान सूखे रखें, नमी पड़ने से बचाएं
  • शिशु के कान की सफाई जरूर करें
  • किसी भी बीमारी का इलाज कराएं
  • नवजात के कान में कोई भी तेल न डालें
  • बच्चों के पोषण का पूरा ध्यान रखें
  • बच्चों के कान दर्द का घरेलु उपचार

आपको यह जान कर बेहद ख़ुशी होगी की आपके नन्हे जिगर के टुकड़ों के कानो में होने वाली तकलीफ से छुटकारा पाने के लिए आपको कही जाने की कोई जरुरत नहीं है। आपकी समस्या का समाधान आपके अपने घर में ही मौजूद है। जी हाँ, हम आपको कुछ घरेलु आयुर्वेदिक उपचार बताने जा रहे है जिनसे की आप अपने बच्चे की तकलीफ तुरंत दूर कर सकें, इसके लिए निम्नलिखित तरीके है –

1. तुलसी
तुलसी के ताजा पत्ते तोड़कर उसका रस निकल लें। और 2-3 बूँद कान में डालें बच्चे को आराम मिलेगा।

2. लहसुन
लहसुन को बारीक करके तेल में गर्म कर लें, इसे ठंडा हो जाने दें फिर कान में कुछ बूँद डालने से लाभ होगा।

3. नीम
नीम फफूंद संक्रमण रोकता है इसकी पत्तियों को पीसकर रस निकाल लें और संक्रमित कान में 2-3 बूँद डाल दें।

4. जैतून
जैतून के तेल से भी दर्द में आराम मिलता है इसकी कुछ बूँद डालकर रहने दें। यह सूजन और दर्द को समाप्त कर देगा।


5. अदरक
अदरक को घिस कर उसे किसी (जैतून या सरसों) तेल में डालकर गर्म कर लें। इस तेल की 2-3 बूँद डालना ही काफी है।

6. आम के पत्ते
आम के पत्ते भी एक कारगर औषधि है। इसके पत्तों को पीसकर निकले रस को गुनगुना करके कुछ बूँद डालने से राहत मिलती है।

7. प्याज
प्याज का रस भी लाभकारी है, सूजन कम करता है। इसे उबाल कर रस निकाले, कान में कुछ बूँद प्रयोग करें। दर्द से निदान मिलेगा।

8. केले के तने का रस
केले के तने का रस निकल कर रात में सोने से पहले 2-3 बूँद प्रभावित कान में डाल दें। इस विधि से सुबह तक आराम मिल जायेगा।

9. अजवाइन का तेल
अजवाइन या अन्य किसी तेल जैसे सरसों को मिलकर गर्म कर लें। और गुनगुना कान में डालें या मालिश करें। बहुत आराम पहुंचेगा।

निष्कर्ष व परिणाम
आपके बच्चे के कान में होने वाले दर्द को परिभाषित करना मुश्किल काम है। क्योंकि एक नन्हे बच्चे की तकलीफ को समझना हर किसी के लिए आसान नहीं है। वह मासूम क्या महसूस कर रहा है? जिसे वह आपको बोलकर बता भी नहीं सकता है, यह जानना कठिन है। ऐसे में बच्चे अपने हालात बस रो कर ही दिखा सकते है। इसलिए बच्चे की आँख से निकलने वाले आंसू को पढ़ना बेहद जरुरी है। छोटे बच्चे की देखभाल के साथ ही उसके कानों का भी विशेष ख्याल रखें जिससे वो बेहतर सुने व स्वस्थ रहें।

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