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हम में से अक्सर कई लोग कान में समस्या (Ear problems) होने पर इसी उधेड़-बुन (असमंजस) में रहते है, की कान में तेल (kan me tel) डालें या नहीं? वैसे देखा जाये तो यह एक बहुत अहम् सवाल (Important question) है क्योंकि हमारे कान एक बेहद ही नाजुक अंग (Delicate organ) है। और मनुष्य के सबसे कोमल संवेदी (Sensory) अंगों में से एक माने जाते है। ऐसे में इनमें होने वाली किसी परेशानी से निजात (riddance) पाने के लिए तेल का प्रयोग करना समझदारी है या है नहीं?

अगर आप कान संबंधी किसी भी समस्या का समाधान या फिर कम कीमत पर कान की मशीन ख़रीदना चाहते है तो 9657588677पर हमसे संपर्क करें।

तो चलिए आज हम आपकी इस भ्रान्ति (Confusion) को दूर करने का प्रयास करते है। जिससे आपको यह फैसला करने में सहयोग मिलेगा की आपको अपने या अपने छोटे बच्चे (chote bachche ke) के कान में तेल डालना चाहिए या नहीं (kan mein tel dalna chahiye ya nahi)? हिंदी में।

क्या वयस्क लोगों के कान में तेल डालना चाहिए?
वैसे तो चिकित्सीय या वैज्ञानिक दृष्टिकोण (perspective) यही कहता है की कान में किसी भी प्रकार का तेल (oil), पानी (water) या अन्य तरल (liquid) पदार्थ नहीं डालना चाहिए। पर इसकी वजह क्या है? डॉक्टर के अनुसार कच्चे तेल (row oil) में भी कई सारे जीवाणु और विषाणु (Bacteria and Viruses) बैक्टीरिया और वायरस मौजूद रहते है। जिससे कान (kan) में तेल डालने पर इनका हमला (attack) हो सकता है और समस्या (samasya) बढ़ भी सकती है। इसलिए कान में तेल डालना बिलकुल भी हितकर नहीं है।

वयस्कों के कान में तेल
वही दूसरी और घर के बड़े-बुजुर्गों और अनुभवी (experienced) व्यक्तियों की बात माने तो कान में तेल डालने से बहुत चमत्कारी लाभ (laabh) मिलते है। यह कान की सफाई करता है, और कई प्रकार की कान की समस्याओं (Ear problems) से आपको बचाता भी है। कान के स्वास्थ्य (health) के लिए कई प्रकार के लाभ भी प्रदान करता है। जिससे कान साफ-सुथरे (clean), नमी-युक्त (moist) रहते है और सुनने की क्षमता (Hearing) बेहतर होती है।

बच्चों के कान में तेल डालना चाहिए या नहीं ?
हमारे कान वैसे भी शरीर के सबसे नाजुक अंगों (naajuk ang) की श्रेणी में आते है। और बच्चे तो खुद ही इतने नाजुक होते है। तो फिर जरा सोचिये की उनके कान (kaan) कितने नाजुक होंगे? जी हाँ इसमें कोई संदेह नहीं है की बच्चों के कान अति संवेदनशील (Sensitive) होते है। ऐसे में क्या बच्चों के कान में तेल (kaan main tail) डालना उचित है?

बच्चों के कान में तेल
वैसे तो नवजात शिशुओं (newborns) या छोटे बच्चों (babies) के कान में किसी भी प्रकार का तेल आदि नहीं डालना चाहिए। पर यदि आपका बच्चा (child) बड़ा है तब फिर आप उसके कान में तेल (kan mein tel) का प्रयोग कर सकते है। पर ऐसा करते वक्त किसी अनुभवी व्यक्ति या डॉक्टर की सलाह (advise) अवश्य लें। और पूरी सावधानी (Caution) के साथ ही ऐसे किसी प्रयोग को अंजाम दें।



कान में होने वाली समस्याएं
हमारे कान बाहरी वातावरण के साथ हमारा एक रिश्ता (relation) कायम करते है। क्योंकि कान ही हमें बाहरी दुनियां से जोड़ते (connect) है। ऐसे में आपके आसपास के क्षेत्र (area) में पाए जाने वाले हानिकारक कण (particles), शोर (noise), वायुदाब (air pressure), और अनेक प्रकार के रोगाणुओं (germs) के कारण (cause) आपके बाहरी या आंतरिक कान में समस्या (वेस्टिबुलर रोग) भी हो सकते है जो की –


  • कान में समस्या
  • कान में मैल भरना
  • कान में दर्द होना
  • बाहरी कान में सूजन
  • मध्य कान में संक्रमण
  • आंतरिक कान में सूजन
  • कान की नस में क्षति
  • कान में पानी जाना
  • कान में दबाव होना
  • कान से तरल बहना
  • कान में खुजली होना
  • कान से बदबू आना
  • कान में सीटी बजना
  • कान में कीड़ा जाना
  • कान का पर्दा फटना
  • कान में हड्डी बढ़ना
  • कान में भारीपन होना
  • सुनने की शक्ति में कमी


कान में तेल डालने के फायदे
यह बात सत्य है की तेल में भी जीवाणु (jeevanu) हो सकते है। इसलिए अक्सर डॉक्टर कान में तेल डालने से मना (prevent) करते है। पर यह भी सच है की तेल को गर्म (warm) करने से सभी जीवाणु मर भी जाते है। इसलिए गुनगुने (Lukewarm) तेल को कान में डालने से फायदा होता है। और कभी भी कच्चा तेल सीधे (direct) कान में नहीं डालना चाहिए। इसे हमेशा लहसुन या अजवाइन जैसी संक्रमण (infection) नाशक औषधियों को डाल कर ही गर्म (hot) करना चाहिए। चलिए अब जानते है तेल के फायदे (fayde) –


  • नारियल का तेल
  • कान से दर्द भागता है
  • सूजन को कम करता है
  • खुजली का नाश करता है
  • जलन समाप्त करता है
  • संक्रमण का अंत करता है
  • रोगाणुओं को नष्ट करता है
  • कान की सफाई करता है
  • मैल का सफाया करता है
  • कान में नमी प्रदान करता है
  • सुनने की शक्ति बढ़ाता है
  • बेचैनी को समाप्त करता है


कान में डालने वाले तेल कौन से है?
कान में हर किसी तेल को नहीं (nahi) डालना चाहिए। सभी तेल कान में फायदा नहीं पहुंचाते है कुछ से नुक्सान (nuksaan) भी हो सकता है। इसलिए हम आपको बता रहे है ऐसे कुछ ख़ास (khaas) तेल जो कान में डालने पर कई लाभ (labh) प्रदान करते है, और आपके कानों के स्वास्थ्य (swasthy) में वृद्धि भी करते है।


  • नारियल का तेल : संक्रमण नाशक
  • जैतून का तेल : दर्द, सूजन निवारक
  • सरसों का तेल : फंगस नाशक
  • बेबी ऑइल : मैल साफ करे
  • बादाम का तेल : सनसनी रोके
  • टी ट्री ऑइल : दर्द निवारक
  • मछली का तेल : खुजली नाशक

कान में तेल डालने के नुक्सान
कान में तेल डालने से कभी कभी नुक्सान (drawback) भी हो  सकता है ऐसा अक्सर गलत तरीको (methods), गलत तेल या लापरवाही के कारण (karan) हो सकता है। इसलिए कान में तेल का प्रयोग करते समय सावधानी (savdhani) बरतना वेहद जरूरी है। या फिर किसी पेशेवर (peshevar) व्यक्ति अथवा कान के डॉक्टर की सलाह (salah) लेना भी आवश्यक है, अन्यथा आपको निम्न नुक्सान (loss) हो सकते है –


  • सुनने में समस्या (Hearing loss) है तो डॉक्टर से पूछे बिना तेल न डालें
  • आपके कान के पर्दे (eardrum) पर इसका खराब प्रभाव पड़ सकता है
  • आप स्थायी रूप से बहरेपन (deafness) के शिकार हो सकते हैं
  • लगातार तेल डालने से ओटो माइकोसिस (Otomycosis) बीमारी हो सकती है
  • ओटो माइकोसिस (Otomycosis) कारण सुनने की क्षमता जा सकती है
  • इयरवैक्स (earwax) निकालने के लिए हर बार कान में तेल न डालें
  • तेल से गंदगी (dirt) कान में जम सकती है और मैल बढ़ सकता है
  • कान में तेल (oil) डालने के कारण संक्रमण (infection) बढ़ भी सकता है
  • नहाते समय कान में पानी (paani) चला गया हो तो तेल न डालें
  • छोटे बच्चों (kids) के कान में अपनी मर्जी से कोई भी तेल न डालें
  • अन्यथा बच्चे (toddler) के कान से पस आने की समस्या हो सकती है
  • कान बहुत ज्यादा तेल अवशोषित (Absorbed) नहीं कर पाता है
  • इसलिए कान के अंदर खुजली (itching) भी हो सकती है
  • खुजली से कान का पर्दा भी प्रभावित (effected) हो सकता है।

निष्कर्ष व परिणाम
हमने आपको कान में तेल डालने से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण तथ्यों (important facts) की जानकारी दे दी है। अतः अब आप इससे होने फायदे (benifits) और नुक्सान (loss) के बारे में तो अब आप जान ही गए है। इसलिए अब इस बारे में आपको अंत में स्वयं फैसला (Self decision) करना होगा। की आपके लिए क्या बेहतर है कान में तेल डालना (daalna) है या नहीं (nahi) डालना। आपका फैसला जो भी हो हम आपसे बस इतना कहना चाहेंगे की कान की परेशानी से जुड़े किसी भी घरेलु इलाज (gharelu ilaaj) को करने से पहले किसी डॉक्टर या अनुभवी व्यक्ति की सलाह (advise) अवश्य लें, जिससे आप बेहतर सुने व स्वास्थ्य रहें।

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