आज की पोस्ट में हम जानेंगे की On Page SEO क्या है इन हिंदी 2019 (What is On Page SEO in Hindi). क्या आपके बहुत सारे पोस्ट पब्लिश करने के बाद भी ब्लॉग पर ट्रैफिक बिल्कुल नही आ रही है या बहुत कम है. इसका मतलब है की आपको पोस्ट Optimization से पेज को perfectly optimize कर के SEO friendly बनाने की ज़रूरत है. अगर आपकी ऑप्टिमाइजेशन स्ट्रांग है तो फिर आप इसी के ज़रिए ही पोस्ट को फर्स्ट पेज पर आसानी रैंक करा सकते हैं. आज हम जानेंगे की On Page SEO क्या होता है और पोस्ट के लिए ऑप्टिमाइजेशन कैसे करते हैं.
अगर आप नहीं जानते की Difference Between On Page and Off Page SEO in Hindi क्या है तो आप यहाँ से इसके बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके पहले हमने जाना था की एसईओ क्या है और ये ब्लॉग के लिए ज़रूरी क्यू होता है. साथ ही ये भी जाना था कीसर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन करने के 2 तरीके होते हैं. पहला ऑन-पेज और दूसरा होता है ऑफ-पेज एसईओ.
इस पोस्ट मे मैं आपको इसे अप्लाई करने तरीका बताऊंगा की इसे कैसे करते हैं. और ये ब्लॉग के लिए क्यू ज़रूरी है इस के बारे पूरी जानकारी दूँगा. इस से पोस्ट को पर्फेक्ट्ली ऑप्टिमाइज़ कर के कैसे पोस्ट को सर्च इंजन फ्रेंड्ली बनाते है साथ ही ये भी जाँएंगे की कैसे आसानी से पोस्ट को सर्च इंजन रैंक करा सकते हैं. अप्टिमिज़ेशन मेथड तो हम बाद मे जानेंगे लेकिन इससे पहले तो हमे ये समझना होगा की On Page SEO क्या होता है (What is On Page SEO in Hindi).

ऑन पेज एसीईओ क्या है इन हिंदी – What is On Page SEO in Hindi 2019

On-Page Search Engine Optimization का ही एक पार्ट है. पोस्ट पब्लिश करने से पहले उसे लिखते या फिर अपडेट करते वक़्त जिस सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन से पोस्ट को ऑप्टिमाइज़ करते हैं उसे On-Page SEO बोला जाता है. इस में परफेक्शन होने से पोस्ट को आसानी से सर्च इंजन के फर्स्ट पेज पर रैंक करा सकते हैं.

On Page SEO definition in hindi

अगर हम सरल भाषा मे बात करें तो वो सारे तरीके जिससे हम अपने ब्लॉग को सर्च एंजिन के फर्स्ट पेज के पहले नंबर पे रैंक करने के लिए इस्तेमाल करते हैं उसे हम सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन कहते हैं . और पोस्ट या आर्टिकल लिखते हुए हम जिन टेक्नीक्स को फॉलो करते हैं उसे On-Page SEO कहते हैं. इसमें अगर हम मास्टर बन गए तो फिर हम अपने हर पोस्ट को सर्च इंजन के फर्स्ट पेज पर आसानी से रैंक करा सकते हैं

इसमें हम कीवर्ड रिसर्च, पोस्ट टाइटल, परमालिंक, मेटा डिस्क्रिप्शन, क्वालिटी कंटेंट, कीवर्ड का सही जगह मे प्रयोग, इमेज अप्टिमिज़ेशन, Headings का सही इस्तेमाल, इंटरनल और एक्सटर्नल लिंकिंग इसके अलावा और भी कई टेक्नीक्स का इस्तेमाल करते हैं.
तो अगर आप सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन मे अपने आप को मास्टर बनाना चाहते हैं तो पोस्ट ऑप्टिमाइजेशन को सिख कर पहले आपको स्ट्रॉंग बनना होगा. जिस दिन आप इस मे माहिर बन जाएँगे आप की ब्लॉग भी सर्च इंजन के पहले रैंक पर आने लगेगी.

On Page SEO करना क्यों जरुरी होता है?

हम अपने ब्लॉग को डाइरेक्ट्ली रैंक नही कराते बल्कि ब्लॉग मे जो पोस्ट लिख कर पब्लिश करते हैं उनको रैंक कराते हैं. जब हमारा कोई पोस्ट सर्च इंजन के फर्स्ट पेज पर पहले नंबर पर रैंक कर जाता है तो इससे पूरे ब्लॉग को फायदा होता है. इससे सिर्फ़ ब्लॉग मे ट्रैफिक ही नही बढ़ता बल्कि डोमेन authority और पेज authority भी इनक्रीस होती है. ये हमारे ब्लॉग से जुड़े हर एरिया को इंप्रूव करता है.
तो अगर आप ऑप्टिमाइजेशन मे अपने आप को मास्टर बनाना चाहते हैं तो पेज लेवल ऑप्टिमाइजेशन को सिख कर पहले आपको स्ट्रॉंग बनना होगा. जिस दिन आप इसमें इसमें माहिर बन जाएँगे आप की ब्लॉग भी सर्च एंजिन्स के पहले रंक पर आने लगेगी.
पेज लेवल Optimized पोस्ट यानी की हाइ-क्वालिटी कंटेंट पोस्ट मे रीडर ज़्यादा समय देते है. क्यूंकि पर्फेक्ट्ली पेज लेवल ऑप्टिमाइज़्ड पोस्ट सर्च इंजन फ्रेंड्ली होने से यूज़र फ्रेंड्ली भी बन जाता है. रीडर्स के लिए ये अच्छा एक्सपीरियंस रहता है जब वो पर्फेक्ट्ली ऑप्टिमाइज़्ड ब्लॉग पोस्ट को रीड करते हैं. इससे ब्लॉग की reputation इनक्रीस होती है.
जब हम अपने किसी पोस्ट को फर्स्ट पेज मे रैंक करने मे सफल हो जाते हैं तो उस पोस्ट से दूसरे पोस्ट को जोड़ कर भी हम दूसरे पोस्ट मे ट्रैफिक ले सकते हैं. और इस तरह से bounce rate को कम करते हैं.
Bounce rate क्या होता है?
जब कोई विज़िटर ब्लॉग मे आते ही बिना एक सेकेंड भी रुके पेज को तुरंत बंद कर दे तो इसे हम बाbounce rate बोलते हैं. हर ब्लॉगर चाहता है की जो भी विज़िटर आए वो ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त ब्लॉग मे पोस्ट को पढ़े. इससे ब्लॉग की ऑप्टिमाइजेशन और अधिक इम्प्रूव होती है.
अगर हम पोस्ट perfectly ऑप्टिमाइज़ कर लेते हैं तो फिर Off-Page SEO मे ज़्यादा मेहनत करनी नही पड़ती. क्यू की सिर्फ़ इसमें स्ट्रॉंग रहने से ही हम पोस्ट को पहले नंबर पर रैंक करा लेते हैं.
तो चलिए अब हम पोस्ट ऑप्टिमाइजेशन के रूप मे होने वेल techniques और तरीक़ो बारे मे जानते हैं.

On Page SEO क्यों करते हैं?

Keyword research करने के लिए सबसे अधिक इन टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है.
जब हम खूब पढ़ाई करते हैं exam के पहले और दिन रात मेहनत कर के एग्जाम लिखने जाते हैं तो जो एग्ज़ॅम अच्छे से लिखता है उसी का रिज़ल्ट ज़्यादा अच्छा होता है. रिज़ल्ट्स ही आउटपुट होता है और हमे पता चल जाता है की किसने अच्छे से पढ़ाई की है.
ठीक उसी तरह हमे भले ही SEO के बारे सब कुछ मालूम हो लेकिन practically सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन करने मे अगर हम कमज़ोर हैं तो फिर हमारे इसके नालेज का कोई फायदा नही है.
Title,Permalink और Meta description का आउटपुट कुच्छ इस तरीके से हम समझ सकते हैं. और ये हमारे पोस्ट ऑप्टमिजाशन की perfection को बताता है.
पोस्ट लिखना शुरू करने से पहले कीवर्ड रिसर्च ज़रूर करे. कीवर्ड रिसर्च एक बहुत ही इंपॉर्टेंट काम है जिसके चारों तरफ ही हमारा पूरा आर्टिकल आधारित होता है.
कीवर्ड रिसर्च करने लए मोस्ट्ली इन टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है.

Difference Between On Page and Off Page SEO in Hindi

पोस्ट लिखते वक़्त हम ऑप्टिमाइजेशन के जिस तरिके को अपनाते हैं और फॉलो करते हैं वो ऑन पेज ऑप्टिमाइजेशन कहलाता है. इस में हम आर्टिकल लिखने में हर  ध्यान में रखते हैं जो इस टेक्निक के अंदर आता है.
जब पोस्ट के बाहर हम अपने साइट की ऑप्टिमाइजेशन जिन तरीको से करते हैं वो ऑफ पेज ऑप्टिमाइजेशन कहलाता है. ये भी बहुत इम्पोर्टेन्ट फैक्टर माना जाता है जो हमारे ब्लॉग के लिए काफी जरुरी होता है.
यहाँ पर मैं आपको इनके बिच में अंतर बताने जा रहा हूँ जिससे आपको इसके बारे में समझ में आ जायेगा. इसे मैं थोड़ा संक्षेप में बता रहा हूँ.
ऑन पेज ऑप्टिमाइजेशन ऑफ पेज ऑप्टिमाइजेशन 
पोस्ट लिखते वक़्त उसके टाइटल टाइटल को ऑप्टिमाइज़ करना और उसमे टार्गेटेड कीवर्ड को डालना जरुरी है.बैकलिंक बिल्डिंग स्ट्रेटेजी को समझे और सही तरीके से इसके रूल्स को फॉलो करके बैकलिंक बनायें.
पर्मालिंक छोटा लिखना चाहिए और इसमें भी कीवर्ड का होना जरुरी है.ऑफ पेज के अंतर्गत सोशल बुकमार्किंग किया जाना एक महत्वपूर्ण स्टेप है.
पोस्ट में Heading 1,2,3 सही  तरीके से इस्तेमाल करें और इनमे कीवर्ड भी डालें.अपने साइट जैसे niche वाली साइट में गेस्ट पोस्ट करना.
मेटा डिस्क्रिप्शन ऐसा लिखें जिसे पढ़ने  विजिटर अट्रैक्ट हो और पोस्ट को जरूर खोलकर पढ़े.डायरेक्टरी सबमिशन करना.
कीवर्ड का इस्तेमाल पहले पैराग्राफ और अंतिम पैराग्राफ में करें.गूगल को सिग्नल देने के लिए सोशल मीडिया वेबसाइट जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम में एक्टिव रहना.
कीवर्ड डेंसिटी रखना होता है  यानी 2.5 % से ज्यादा न हो.फोरम सबमिशन
इमेज के Alt Tag में कीवर्ड का इस्तेमाल करना होता है.ब्लॉग में कमेंट करना
इंटरनल और एक्सटर्नल लिंकिंग बहुत जरुरी होता है.डिस्कशन वेबसाइट में एक्टिव रहना जैसे Quora में अपने लिंक शेयर करना और लोगों की डाउट को क्लियर करना .

ब्लॉग को सर्च इंजन में रैंक करने के  11 On Page SEO टेक्निक्स

1. Post Title

इस मे पोस्ट टाइटल का सबसे इंपॉर्टेंट रोल होता है. पोस्ट टाइटल मे कीवर्ड का सही इस्तेमाल कर के हम अपने पोस्ट को सर्च इंजन के लए पर्फेक्ट्ली ऑप्टिमाइज़ करते हैं. इसके अंतर्गत पोस्ट टाइटल बहुत ही इंपॉर्टेंट फैक्टर है.

On-Page SEO Wtechni
इस स्क्रीनशॉट मे आप आसानी से समझ सकते हैं की हमारा आउटपुट किस तरह दिखाई देगा जब हम Post title, Permalink और Meta description को perfectly  optimized कर लेंगे.
पोस्ट टाइटल कैसे लिखें और इसमे कीवर्ड्स का इस्तेमाल किस तरह करें की हमारा पोस्ट टाइटल सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़्ड हो जाए. इसके लिए मैं आपको कुछ टिप्स दे रहा हू जिससे आप कीवर्ड को अपने टाइटल मे पर्फेक्ट्ली लिख सकते हो.
(a) Keyword Placement :  Targeting Keyword ( यानी पोस्ट से रिलेटेड कीवर्ड, जिस कीवर्ड से आप अपने पोस्ट को रैंक कराना चाहते हैं) को अपने पोस्ट टाइटल के शुरू मे रखें. “Post Title” की शुरुआत कीवर्ड से ही करने की कोशिश करे.
मैं मानता हू की हर पोस्ट का टाइटल हम कीवर्ड से शुरू नही कर सकते हैं, कभी कभी फिट भी नही होता. लेकिन ट्राइ करे की टारगेटेड कीवर्ड पोस्ट टाइटल के लास्ट मे ना हो.
On-Page SEO Kya Hai Blog Ko First Page Par Kaise Rank Karaye  Perfectly Optimized
Kaise Blog Ko On-Page SEO Kar Ke se First Page Par Rank karaye   50% Good
Kaise Blog Ko First Page Par Rank Karaye On-Page SEO Se            Bad Placement
(b) Use Effective Words: पोस्ट टाइटल को और भी  SEO friendly बनाने के लिए इन वर्ड्स का इस्तेमाल करे. जैसे Effective, Most, Important, Best, Top, Strategies, Surprising, Essential, Ultimate guide, Beginners guide, Complete guide इन वर्ड्स के इस्तेमाल से टाइटल और अट्रैक्टिव बना सकते हैं.

(c) Use Of Numerics:  टाइटल मे नंबर्स add करे इससे लोगों को attract करना आसान होता है. वो जल्दी ऐसे पोस्ट को read करते हैं.
example:
10 effective methods
5 Best Plugins
10 Mistakes We should avoid etc.
(d) Avoid Repetition of keyword: पोस्ट के टाइटल मे कीवर्ड सिर्फ़ एक ही बार प्रयोग करे. इसे एक से ज़्यादा बार बिल्कुल ना डाले. कीवर्ड repetition नेगेटिव ऑप्टिमाइजेशन के represent करता है.
example: सपोज़ इस पोस्ट मे हमारा कीवर्ड “On-page SEO” है. तो चलिए देखते हैं इसका टाइटल हम कैसे लिख सकते हैं.
“On-Page SEO kya hai Aur On-Page SEO Kaise karte hain” ये Wrong Method  है Title में कीवर्ड इस्तेमाल करने का. (इसमें कीवर्ड है “On-Page SEO” जो  2 बार इस्तेमाल किया गया है.)
“On-Page SEO Kya hai Aur Isse Blog Ko Optimize Kaise Karte Hain” Correct Method.
(e) Optimal Title Length: टाइटल की लेंथ इस तरह लिखे की वो सर्च रिज़ल्ट मे पूरा आए और अगर ज़्यादा long Title होगी तो वो पूरी दिखाई नही देगी. बहुत छोटा टाइटल भी SEO के acceptable नही होती.

2. Perfect SEO Permalink

Title की ही तरह पोस्ट के लिए  Permalink  भी  On-Page के लिए इम्पोर्टेन्ट होता है. Permalink  मे भी हमे फोकस कीवर्ड add करना ज़रूरी होता है. इसके अलावा मैं आपको कुछ टिप्स बता रहा हू उसे ज़रूर फॉलो करे.
(a) Short URL:  पर्मालिंक को हमे छोटा रखना चाहिए. और इसके साथ साथ ही इसमें अपना फोकस कीवर्ड या main कीवर्ड जरूर डालना चाहिए.
पर्मालिंक को हमे छोटा रखना चाहिए और इसके साथ ही इसमे अपना फोकस कीवर्ड या मैं कीवर्ड ज़रूर डालना चाहिए.
wtechni.com/on-page-seo-kya-hota-hai-aur-isse-blog-ko…..Negative 
wtechni.com/on-page-seo-kya-hai   Positive  
(b) Delete Useless Permalink
Useless URL को delete कर के manually सर्च इंजन friendly URL को enter करे.
wtechni.com/?p=101   Negative 
wtechni.com/on-page-seo-kya-hai   Positive  
Actually जब हम टाइटल एक्सट्रा length की लिखते हैं तो permalink automatically  “webtak.in/?p=101”  इस तरह का बन जाता है. सो कभी भी पेरमालिंक इस तरह का ना इस्तेमाल करे. इसे खुद ही चेंज कर ले, जैसा यहाँ मैं आपको बता रहा हू उसी तरीके से प्रोसेस को फॉलो करे.
(c) Never Use Stop Words
“a”, “the”, “on”, “and” इस तरह के words को stop word बोला जाता है. Permalink में इन वर्ड्स को कभी भी  इस्तेमाल न करे तो ये SEO के लिए बेहतर है.

 3. Meta Description

कहते हैं ना फर्स्ट इंप्रेशन इस थे लास्ट इंप्रेशन. यही काम हमारा Meta Description भी करता है. सर्च इंजन की नज़र मे Title और Permalink के बाद जो important factor है वो Meta Description है.
Meta Description अच्छे से इस्तेमाल करना ज़रूरी है क्यूंकि इससे भी हम अपने पेज को आसानी से रैंक करा सकते हैं. हमे एसईओ ऑप्टिमाइज़्ड Meta Description लिखना चाहिए जो हमारे रीडर्स को convince कर ले की जो इन्फर्मेशन वो सर्च कर रहे हैं इस पोस्ट मे वो उपलब्ध है.
गूगल के अनुसार कुछ महीने पीछे तक 320 वर्ड्स long description allowed था. लेकिन अभी description की length 150-170 वर्ड्स के बीच ही होना चाहिए. अपनी पोस्ट की description मे कीवर्ड का इस्तेमाल ज़रूर करे.

4.  Keywords Density Inside Content

हमे अपने कंटेंट के पहले पैराग्राफ मे ज़्यादा density मे कीवर्ड्स इस्तेमाल करने चाहिए. कंटेंट के शुरूआती 100-150 वर्ड्स के अंदर मे कीवर्ड्स को अच्छी density मे ज़रूर include करे.
कीवर्ड रिसर्च इसीलिए किया जाता है की हमे सर्च एंजिन से अच्छी organic traffic मिल सके. इसके साथ ही कीवर्ड्स का selection CPC को ध्यान मे रख कर ही किया जाता है. कीवर्ड को कंटेंट के अंदर properly इस्तेमाल करने से सर्च इंजन को पता चलता है की कंटेंट किस बारे मे लिखा गया है. और इस तरीके से सर्च इंजन मे हमारी पोस्ट अच्छे से ऑप्टिमाइज़्ड हो जाती है.
पोस्ट के अंदर कीवर्ड की density maximum 2.5% होनी चाहिए.

 5.  Proper Use of Heading and Sub-heading With Keywords

इस का इस्तेमाल कर के बेहतर रिजल्ट पाने के लिए हम Headings का इस्तेमाल का करते हैं. H2,H3,H4 heading के proper इस्तेमाल कर के हम अपनी ऑप्टिमाइजेशन तकनीक को स्ट्रॉंग करते हैं. Headings का repeatation बार बार ना करे.
कभी भी H1 heading का इस्तेमाल अपने पोस्ट के अंदर ना करे. क्यूंकि already हमारे पोस्ट का Title H1 heading मे ही होता है.
Heading मे अपना फोकस कीवर्ड भी डालें ये हमारे पोस्ट के लिए  बहुत effective होता है. लेकिन ये ध्यान रखे की 50% से कम headings मे ही फोकस कीवर्ड का इस्तेमाल करे.

Note : आपको ये भी ध्यान मे रखना है की लिमिट से ज़्यादा कीवर्ड्स को Heading में इस्तेमाल न करें.

6. Image Optimization

इमेजेज को हम अपने विज़िटर्स को attract करने के लिए इस्तेमाल करते हैं. इमेज मे हम अपने पोस्ट के टॉपिक बिना लिखे ही डिस्क्राइब कर सकते हैं. विज़िटर्स perfectly ऑप्टिमाइज़्ड इमेज से समझ जाते हैं की उन्हे जो इन्फर्मेशन चाहिए वो यहाँ उन्हे मिल जाएगी.
ध्यान रखने वाली बात ये है की हम इमेज को डिज़ाइन करते वक़्त कुछ फैक्टर्स को भी फॉलो करना ज़रूरी होता है. इन factors के इस्तेमाल से हम हमारा इमेज 100% एसईओ ऑप्टिमाइज़्ड और और यूज़र फ्रेंड्ली बना सकते हैं. एसईओ फ्रेंड्ली इमेज हमारे On-page को बहुत स्ट्रॉंग बनाती है.
(a) Image Title: पोस्ट के अंदर इस्तेमाल होने वाले इमेज का टाइटल मे कीवर्ड का इस्तेमाल करे. इससे ये फायदा है की सर्च इंजन हमारे इमेज के टाइटल से कीवर्ड को पहचान लेता है और हमारे पोस्ट को रैंक करने मे मदद मिलती है.
इमेज के टाइटल मे unknown titles को ना इस्तेमाल करे बल्कि उन्हे remove कर दे.
124569.jpg           Negative 
on-page-seo kya-hai.jpg    Positive
(b) ALT Tag : इमेज टाइटल के साथ साथ alt tag लिखना भी हमारे पोस्ट को सर्च इंजन फ्रेंड्ली बनाता है. मोस्ट इंपॉर्टेंट इसमे अपना फोकस कीवर्ड ज़रूर add करे.
(c) Image Size : इमेज साइज़ हमारे पोस्ट ऑप्टिमाइजेशन के लिए इंपॉर्टेंट factor साबित होता है. हम अपने पोस्ट मे हमेशा  इमेज का इस्तेमाल करते ही हैं. इमेज की साइज़ कम से कम होनी चाहिए. इससे ब्लॉग के पेज को लोड होने मे ज़्यादा टाइम नही लगेगा.

(d) Featured Image : अपने रीडर्स को यूज़र फ्रेंड्ली एक्सपीरियन्स देने के लए अपने पोस्ट मे फीचर्ड इमेज बनाकर डालें. Thumbnail के रूप मे जिस इमेज को हम इस्तेमाल करते हैं उसे ही फीचर्ड इमेज कहते हैं.

7. Use Outbound and Internal Links

अपने पोस्ट को और एसईओ फ्रेंड्ली ऑप्टिमाइज़ करने के लिए External और Internal लिंक्स का ज़रूरत के अनुसार इस्तेमाल करे . जब हम अपने पोस्ट मे किसी दूसरे वेबसाइट का लिंक add करते हैं तो वो External लिंक और खुद के ब्लॉग पोस्ट का लिंक add करते हैं उसे Internal लिंक्स बोलते हैं.
जब हम किसी दूसरे ब्लॉग या वेबसाइट का लिंक अपनी पोस्ट मे add करते हैं तो इस तरह से हम उन्हे एक बैकलिंक देते हैं. जो उनके SEO के लिए बहुत हेल्पफुल साबित होती है. साथ ही हमारी खुद की भी अनुभव स्ट्रॉंग होती है.
(a) Internal Links :  User engagement बढ़ाने के लिए हम internal linking का इस्तेमाल करते हैं. Internal linking से हम यूज़र को ये शो करा देते हैं की आप अगर एक फल आम की तलाश मे यहाँ आए हो तो आपको सारे फ्रूट्स fruits apple,banana, orange, etc. यहीं पर मिल जाएँगे. इससे हम अपनी कंटेंट की क्वालिटी का पूरा इस्तेमाल कर के landing page से यूज़र को बाकी दूसरे pages मे भी engage कर सकते हैं.
मान लीजिए मेरे एक पोस्ट मे traffic बहुत ज़्यादा है बाकी पोस्ट की तुलना मे तो उस पोस्ट से हम दूसरे पोस्ट का लिंक add कर के ट्रॅफिक पा सकते हैं.
लेकिन याद रहे रिलेटेड पोस्ट को इंटर्नल लिंक्स के रूप मे add करे.
(b) External Linking : जब हम अपनी पोस्ट मे किसी दूसरी वेबसाइट को जोड़ते हैं तो इसे external linking बोलते हैं. मान लीजिये की हमारी पोस्ट मे हम Youtube की किसी फीचर के बारे मे लिख रहे हैं और उसकी कुछ इन्फर्मेशन के लिए youtube हेल्प फोरम मे इन्फर्मेशन दी हुई है तो उसका लिंक हम अपने पोस्ट मे add कर सकते हैं. और ये एसईओ फ्रेंड्ली है इससे कोई प्राब्लम नही है. बल्कि इससे हमारी सर्च इंजन की रैंकिंग बढ़ती है.

 8.  Long Content Post

गूगल सर्च रिज़ल्ट मे फर्स्ट पेज मे रैंक करने के लिए जितना लम्बा हो सके उतना लम्बा पोस्ट लिखें. आजकल तो बहुत से ऐसे भी ब्लॉगर हैं जिनकी पोस्ट 2000 वर्ड्स की होती हैं और साथ में उनकी कंटेंट क्वालिटी भी अच्छी होती है. तो अब आप समझ सकते हैं अगर आपको गूगल के फर्स्ट पेज पर अच्छी रैंक पाना चाहते हैं तो आपको हर पोस्ट को 2000 वर्ड्स से अधिक का लिखना होगा साथ ही कंटेंट क्वालिटी भी बेहतरीन रखनी होगी.
लेकिन अगर आप उतना नही लिख सकते तो ट्राइ करे की कम से कम 1000 वर्ड्स ज़रूर हो. इससे कम होने से फर्स्ट पेज मे आने के चान्स बिल्कुल कम होंगे.
साथ ही कंटेंट की लम्बाई जितनी ज़्यादा होगी कीवर्ड्स की density आप उतनी अधिक रख सकते हैं. Density तो 2.5 % से कम ही रखना है लेकिन आपके keyword अधिक बार इस्तेमाल होंगे. इससे गूगल को टॉपिक समझने मे उतनी ही आसानी होगी ये किस बारे मे है. इस तरह सर्च रिज़ल्ट मे higher रैंकिंग मिलने का चांस अधिक रहेगा.
गूगल चाहता है की जो भी रीडर आए उसको उस ब्लॉग से जानकारी मिले जिसने उस टॉपिक के बारे मे सबसे बढ़िया लिखा है. और अपने पोस्ट में में सबसे बढ़िया तरीके से कंप्लीट इन्फर्मेशन दी है.

9. Page Loading Speed

गूगल किसी ब्लॉग पोस्ट को अपने सर्च रिज़ल्ट मे रैंक देने से पहले हर तरह से चेक करता है. पेज की स्पीड भी बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर है एसईओ फ्रेंड्ली ब्लॉग के लिए . साथ ही पोस्ट ऑप्टिमाइजेशन के अंडर ये बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर है.
पेज की लोडिंग स्पीड अच्छी होती है तो google bots पोस्ट को जल्दी इंडेक्स करते हैं. अच्छी लोडिंग स्पीड बेहतर यूज़र एक्सपीरियंस के लिए इंपॉर्टेंट होता है. Slow loading होने वाले ब्लॉग पोस्ट को गूगल सर्च रिज़ल्ट्स मे अच्छी रैंक नही देता.
आप स्पीड increase करने वाले plugins का इस्तेमाल कर सकते हैं.
होमपेज पर कम से कम कंटेंट्स का इस्तेमाल करें जैसे widgets, posts, links और images. Images की size  ऑप्टिमाइज़्ड कर के रखे जिससे इमेज की साइज़ कम हो और फास्ट लोडिंग हो.
ब्लॉग की टेंपलेट या थीम कम से कम कोड्स का इस्तेमाल कर के लिखी गई हो और साथ ही responsive हो और फास्ट लोडिंग होती हो. रिसर्च मे पाया गया है की जिस ब्लॉग या वेबसाइट की लोडिंग टाइम 3-4 सेकेंड से कम होती है उसे विज़िटर्स तुरंत बंद कर देते हैं और दूसरी साइट पर चले जाते हैं.
तो अगर आपकी ब्लॉग की स्पीड कम है तो ये एक serious बात है. इसे जल्दी solve करे.

10. Use Social Sharing Buttons

अगर हमारी content की क्वालिटी अच्छी है तो फिर इसे social sharing buttons के ज़रिए भी हमारे रीडर्स हर जगह शेयर  करेंगे. शेरिंग का ऑप्शन ना रहने से चाहते हुए भी उसे कोई शेयर नही करेगा. सोशल शेयरिंग का इस्तेमाल कर के हम अपने पेज व्यूज बढ़ा सकते हैं. सोशल साइट से आने वाले विजिटर जब हमारे पेज पर टाइम बिताते हैं तो गूगल को एक तरह से पॉजिटिव सिग्नल मिलता है.
वर्डप्रेस यूजर बहुत ही आसानी से सोशल शेयरिंग plugins को इनस्टॉल कर के इस तरह के शेयरिंग buttons enable कर सकते हैं.

11. Use of related informative Video

आजकल लोग text content के साथ साथ media contents से ज़्यादा attract होते हैं. तो हमे चाहिए की text content  मे  well Optimized images aur videos भी add करे. अगर आप गूगल analytics का इस्तेमाल करते हैं तो आपको मालूम होगा Bounce rate और पेज पर Time के बारे मे.

(a) Bounce rate : जब कोई विज़िटर हमारे ब्लॉग के landing page पर आकर बिना किसी दूसरे पेज पर गए वापस चला जाता है तो इसे Bounce rate बोलते हैं.
(b) Time On Page : कोई विज़िटर हमारी ब्लॉग पर जितना देर रुकता है उसे Time on page बोलते हैं.
वीडियो कॉंटेंट add करने से हम रीडर्स को कुछ देर अपने पेज पर रोक सकते हैं इससे bounce rate घट जाता है और साथ ही Time duration भी बढ़ता है. जो की हमारी सर्च रॅंकिंग को increase करता है.
जो भी वीडियो अपने पोस्ट मे add करे वो उसी टॉपिक का वीडियो रूपांतरण होना चाहिए. जिससे यूज़र को और बेहतर  एक्सपीरियेन्स हो और वो पोस्ट मे टाइम ज़्यादा spend करे.
गूगले हर छोटी से छोटी बातों को भी notice करता है और उन्हें अहमियत देता है. इसीलिए एसईओ फ्रेंड्ली पोस्ट लिखना बहुत ज़रूरी है साथ ही विज़िटर्स जितनी देर पेज पर रुकेंगे ranking उतनी अच्छी मिलेगी.

संक्षेप में

बिना अच्छे ऑप्टिमिज़्ज़ातिओं के पोस्ट को रैंक कराना काफी मुश्किल है यहाँ तक रैंक करना तो दूर पहले पेज पर भी हमारा पोस्ट नहीं जा सकता है. इसीलिए आज की इस पोस्ट को अगर आप ध्यान से पढ़ते हैं और फॉलो करते हैं तो फिर आपकी नॉलेज बढ़ जाएगी.  धीरे धीरे अनुभव भी होता चला जायेगा . अगर ब्लॉगर के रूप में सफल होना चाहते हैं तो फिर इसमें माहिर बनना जरुरी है. तो फ्रेंड्स आप लोगों को ये पोस्ट On Page SEO क्या है (What is On Page SEO in Hindi) और कैसी लगी. अब आप समझ ही गये होंगे की Difference Between On Page and Off Page SEO in Hindi और ये  ब्लॉग के लिए क्यू ज़रूरी है.
On page SEO कैसे करे और इसकी परिभाषा क्या है इससे रिलेटेड कोई भी प्राब्लम हो तो कमेंट बॉक्स मे पूछ सकते हैं. इस तरीके को फॉलो कर के आप अपने हर पोस्ट को अच्छी rank पर ला सकते हैं. जितनी ज़्यादा पोस्ट rank होगी ट्रॅफिक उतनी ज़्यादा होगी. ब्लॉग की कामयाबी, ट्रॅफिक पर ही depend करती है. अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगे तो इसे अपने फ्रेंड्स के साथ ज़रूर शेर करे साथ ही इस पोस्ट को सोशियल साइट्स फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम मे भी अपने दोस्तों को शेयर करे.